मुक्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कुपोषण पर अपने विचार रख कर देश मे एक बहस छेड दी है और एक तरह से अच्छा हुआ बुखमरी, कुपोषण और खाद्य सुरक्षा पर बहस तो शुरू हुई I ये देश और दुनिया मे एक बड़ा संकट हैI भारत मे कुपोषण किसी से छुपा नहीं है पर कोई भी इस मुदे पर बात नहीं करता और करता भी है तो कोई इसका हल नहीं निकालता है I जनसंख्या और अर्थशास्त्र के संदर्भ में भारत के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में से एक है, इसमे कोई शक नहीं पर कुपोषण एक बड़ी समस्या है I तो इसका कारण क्या है ?
http://hungamaforchange.org/HungamaBKDec11LR.pdf
इस रिपोर्ट मे भुकमरी और कुपोषण पर कुछ तथ्य रखे है I देश की सरकार या इस देश के लोग या इसके संसाधन की कमी या सरकार की उदासीनता कुछ लोग इस का कारण गरीबी बेरोजगारी या पर्यावरण को देते है पर मेरा मानना है की इसका एक बड़ा कारण इस देश की बढती हुई जनसंक्या है I 1,139.96 लाख की आबादी और 10-14% सालाना (2001-2007) से बढ़ रही थी और आज के समय मे देश की जनसंक्या 1,21,01,93,422 है जिसकी विकास दर 20.3 % प्रति वर्ष है I ये एक बड़ी चिंता होनी चाहिए I भारत के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है पर बढती जनसंक्या और संसाधनों का उपभोग मे बड़ा अंतर आ रहा है I
एक बहुत बढ़िया उदहारण दे रहा हु यदि दो परिवार को ले एक जेसे कमाई करते है I उनके मुखिया एक जेसा काम करते है, पर एक के घर मे 4 लोग है और दुसरे के घर मे 10 लोग है मान लीजिये दोनों चार रोटी कमाते है तो दोनों मुखिया को अपने परिवार का बरण पोषण सामान रूप से करते है तो पहला परिवार का मुखिया तो अपने परिवार को कम से कम एक रोटी तो खिला पा रहा है पर क्या दूसरा परिवार का मुखिया अपने परिवार को पूरा पोषण दे पा रहा है ठीक यही हालत हमारे देश के संसाधन और खाद्य उत्पादन की है हमारे पास खाद्य उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है पर जनसंक्या का बोझ सब सुविधाओ और व्यवस्था पर असर डालता है तो जब तक जनसंक्या पर नियंत्रण नहीं होता तब तक कुछ भी करे तो भी वो कम होगा
http://hungamaforchange.org/HungamaBKDec11LR.pdf
इस रिपोर्ट मे भुकमरी और कुपोषण पर कुछ तथ्य रखे है I देश की सरकार या इस देश के लोग या इसके संसाधन की कमी या सरकार की उदासीनता कुछ लोग इस का कारण गरीबी बेरोजगारी या पर्यावरण को देते है पर मेरा मानना है की इसका एक बड़ा कारण इस देश की बढती हुई जनसंक्या है I 1,139.96 लाख की आबादी और 10-14% सालाना (2001-2007) से बढ़ रही थी और आज के समय मे देश की जनसंक्या 1,21,01,93,422 है जिसकी विकास दर 20.3 % प्रति वर्ष है I ये एक बड़ी चिंता होनी चाहिए I भारत के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है पर बढती जनसंक्या और संसाधनों का उपभोग मे बड़ा अंतर आ रहा है I
एक बहुत बढ़िया उदहारण दे रहा हु यदि दो परिवार को ले एक जेसे कमाई करते है I उनके मुखिया एक जेसा काम करते है, पर एक के घर मे 4 लोग है और दुसरे के घर मे 10 लोग है मान लीजिये दोनों चार रोटी कमाते है तो दोनों मुखिया को अपने परिवार का बरण पोषण सामान रूप से करते है तो पहला परिवार का मुखिया तो अपने परिवार को कम से कम एक रोटी तो खिला पा रहा है पर क्या दूसरा परिवार का मुखिया अपने परिवार को पूरा पोषण दे पा रहा है ठीक यही हालत हमारे देश के संसाधन और खाद्य उत्पादन की है हमारे पास खाद्य उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर हो रहा है पर जनसंक्या का बोझ सब सुविधाओ और व्यवस्था पर असर डालता है तो जब तक जनसंक्या पर नियंत्रण नहीं होता तब तक कुछ भी करे तो भी वो कम होगा

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