आज कल रोज हम हिंदुत्व और सेकुलर शब्दों को सुनते हैI आखिर ये हिंदुत्व और सेकुलर क्या होता है ? क्या हम इन शब्दों के मायने जानते है ? आखिर इन शब्दों के क्या अर्थ है ? और आज इन हिंदुत्व और सेकुलर की आवश्यकता है या हमारी रोज की समस्या की तरफ ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है I हिंदुत्व को मानने वाला किस प्रकार सेकुलर है क्या ये किसी ने जानना चाहा जो हिंदुत्व को मानने वालो को गेर संप्रादियक कहते है क्या वो जानते है की हिंदुत्व का सही अर्थ क्या है I यहाँ हिंदुत्व और सेकुलर शब्दों पर मे कुछ तथ्य रख रहा हु I
सेकुलरिस्म जिसको हिंदी
मे गेर सम्प्रदायिकता कहते है I सबसे पहले ये शब्द 1846 मे Jeorge Jacob Holyoake जो की इंग्लैंड मे सेकुलरिस्म
के प्रणेता थे I उन्होंने इसका उपयोग किया,
Holyoake एक बड़े समाज सुधारक थे I जिनका मानना
था की सरकार अपना हर फेसला गरीब असहाय लोगो की आवश्यकता के अनुरूप उनके भविष्य को ध्यान
मे रख कर करना चाहिए I वो भी बिना सामाजिक, धार्मिक या जातीय भेदभाव के, उनका ये विचार
उस समय चर्च के अत्याचारों के विरुद्ध था I
Holyoake के अनुसार सेकुलरिस्म की परिभाषा “Secularism is that which seeks the development of the
physical, moral, and intellectual nature of man to the highest possible point,
as the immediate duty of life — which inculcates the practical sufficiency of
natural morality apart from Atheism, Theism or the Bible — which selects as its
methods of procedure the promotion of human improvement by material means, and
proposes these positive agreements as the common bond of union, to all who
would regulate life by reason and ennoble it by service"
इस परिभाषा को यदि बडे रूप मे देखा जाय
तो इसका अर्थ यह हुआ
की भोतिक, नेतिक और बोद्धिक, विकास पर सभी लोगो का हक है
I उनकी ये परिभाषा पूरी तरह से मनुष्य के विकास के इर्ध-गिर्ध घुमती है, मतलब समाज के हर तबके के विकास की बात करती है I पर भारत मे शब्द सेकुलरिस्म को बड़ी संकीर्ण रूप
मे देखा जाता है I उसको केवल हिन्दू धर्म और मुस्लिम धर्म के बीच बांध दिया गया I जो लोग सेकुलरिस्म का
उपयोग अपने राजनितिक स्वार्थ के लिए करते है, वो न तो सेकुलरिस्म को समझते है और न ही
उसके वास्तविक अर्थ को समझ पायेंगे I
अब हम
शब्द हिंदुत्व को देखते है तो पहली नज़र मे इस
को हिन्दू धर्म से जोड़ा जाता है जो की सही भी
है I सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया के अनुसार 1995 मे हुये एक फेसले मे हिंदुत्व के बारे ये कहा गया "the way of life of the Indian people
and the Indian culture or ethos". मतलब हिंदुत्व एक जीवन शेली है और
ये केवल भारत जेसे महान देश मे ही संभव है I सनातन हिंदुत्व की भाषा संस्कुत मे एक श्लोक है, “ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनःसर्वे शन्तु निरामयाः।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥." जिसका अर्थ है की सम्पूर्ण विश्व सुखी हो निरोगी हो और ये सुखी शब्द सभी के लिए हो मतलब ये सब
सेकुलरिस्म की Holyoake की परिभाषा से मिलता जुलता है I वास्तविकता मे हर हिन्दू जनम से ही हिन्दू संस्कारो से सेकुलर बन जाता हैIहिन्दू धर्म हर धर्म हर व्यक्ति को समान रूप से देखता हैI हिंदुत्व राष्ट्र के हर तबके के सर्वांगिक विकास की बात करता हैI स्वामी विवेकानन्द ने
लिखा है "हिंदू धर्म सभी धर्मों की माँ है" . तो कोई हिंदुत्व को मानने वाला उसकी बात करने वाला केसे गेर संप्रादियक हो सकता है I
आज भारत मे हिंदुत्व और सेकुलरिस्म को लेकर बड़ी बहस की आवश्यकता है, एसे मे जब देश मे
कुछ लोग सेकुलरिस्म को अपने स्वार्थ के लिए अपने हिसाब से गड रहे है, और हिंदुत्व को बदनाम कर रहे है
I हिंदुत्व के
नाम पर बाकि धर्मो को डरा के रखना चाहते है और उनके डर का फायदा उठा कर वोट हासिल करना चाहते है I एसे लोगो को
बेनकाब करना चाहिए I साथ ही हिंदुत्व के बारे मे लोगो को जागरूक करना चाहिएI कुछ लोग
कहते है की हिंदुत्व को मानने वाला देश के बड़े पदों पर नहीं रहना चाहिए I मेरा मानना है
की देश के बड़े पदों पर एसा व्यक्क्ति को बेठना चाहिए जो न तो हिन्दू के बारे मे सोचे न मुस्लिम के बारे मे
न सिख और न ईसाई के बारे मे वो केवल देश और उसमे बसने वाले नागरिको के विकास के बारे मे सोचे I और इस
मे जो सक्षम है वही देश के नेतृत्व करने के योग्य होना चाहिए I न की बड़े परिवार के सदस्य होने के
नाम पर या ढोंगी सेकुलरिस्म के नाम पर हो I
आज देश के लिए मुख्य मुदा विकास
होना चाहिए न की सेकुलर या नॉन -सेकुलरI यदि कोई विकास कर रहा हो I जिसकी नीतियों के
कारण समाज के हर तबके को बिना किसी भेदभाव के विकास का फायदा मिल रहा हो तो उसको केवल
इस कारण ख़ारिज कर देना की वो नॉन-सेकुलर है, तो ये पुरे देश के साथ अन्याय करना होगा,
उसकी नीतियों का फायदा मिलने से देश वंचित रहा जायगा यदि सेकुलरिस्म, जातीवाद और परिवारवाद
के बजाये लोग योग्यता को आधार बना कर उच्च पदों के लिए चुने तो इसका बड़ा फायदा देश
और जनता को मिलेगा इस प्रकार सेकुलरिस्म के नाम पर ठगे जाने का कोई लाभ नहींI इस तरह के सेकुलरिस्म, जातीवाद और परिवारवाद नाम पर लोगो को चुनना अपना वोट बर्बाद करना है