Tuesday, April 23, 2013

आतंकवाद और अपराध के खिलाफ भारत की लड़ाई की काली सच्चाई

इस समय हम वैश्विक लड़ाई लड़ रहे है आतंकवाद के खिलाफ और प्रत्येक देश इस समय इस लड़ाई में सहयोग कर रहा है एसे में भारत की क्या भूमिका है इस युद्ध में भारत भी इस आतंकवाद का शिकार रहा है और इस  वैश्विक लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभा रहा है पर क्या ये सच है क्या हमारी सरकार में बेठे लोग और भारत के तथाकतित सेक्युलर राजनेता इस लड़ाई को लेकर गंभीर है  मुझको इस में शक है क्योकि कई एसे मामले पिछले कुछ दिनों में सामने आये है जो की इन राजनेताओ की गंभीरता पर सवाल उठता है
इसमें से कुछ मामले में सामने रख रहा हूँ पहला है मशहूर सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर का मामला ये मामला  यह राजस्थान और गुजरात पुलिस के संयुक्त अभियान है. पुलिस के अनुसार   ये आदमी गुजरात में अपराधिक रेकेट में शामिल था ये आदमी गुजरात में अपराधिक रेकेट में शामिल था साथ ही मध्य प्रदेश में हतियारो की तस्करी तथा हत्या के कई मामले राजस्थान और गुजरात में शिकायते दर्ज है उसके सम्बन्ध लश्कर ए तैयबा तथा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के साथ जुड़े होने की बात सामने आई है इसका  लक्ष्य भारत के लोकप्रिय नेता  जो गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी है को मारने का था पर इस से पहले की वो इस कम को अंजाम तक पहुचता पुलिस और सुरक्षा एजेंसी ने उसको मार गिराया लेकिन कुछ राजनीतिक लाभ के लिए  कुछ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलों और कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता ने इसे एक राजनीतिक मुद्दा बना दिया . यह हमारे लिए बहुत ही शर्मनाक है. यदि ये एक आम आदमी होता और उसका क़त्ल पुलिस द्वारा किया जाता तो इनका विरोध समझ में आता पर वो आम आदमी नहीं था वो एक हत्यारा और आतंकियों से सम्बन्ध रखने वाला एक देश द्रोही था इसकी पूरी कहानी इस लिंक में देखे सोहराबुद्दीन का सच भाग १  सोहराबुद्दीन का सच भाग 2  सोहराबुद्दीन का सच भाग 3 सोहराबुद्दीन का सच भाग 4 सोहराबुद्दीन का सच भाग 5 ये एक मामला नहीं है. एसे कई मामले है जो देश की सुरक्षा एजेंसी को निरुत्साहीत करते है
इसी में का एक और मामला मोहन चंद शर्मा आईपीएस दिल्ली स्पेशल सेल का है जो की मशहूर बाटला एनकाउंटर केस से सम्बंदित है जहाँ कुछ संदिग्ध आतंकी (इंडियन मुजाहिदीन के) बाटला हॉउस में छुपे हुए थे जहाँ कुछ संदिग्ध आतंकी (इंडियन मुजाहिदीन के) बाटला हॉउस, जामिया नगर, दिल्ली में छुपे हुए थे इनको 19 सितम्बर 2008, को पुलिस की कारवाही में मार  दिया गया जिनमे से दो संदिग्ध आतिफ अमिन और मोहमद साजिद मारे गए और  मोहमद सैफ और जीशान इस में जीवित पकडे गए परन्तु इस कारवाही का नेतृत्व कर रहे इन्स्पेटर शर्मा शहीद हो गए  इस केस में भी उन तथाकतित सेक्युलर पार्टियों ने और मानवाधिकार संघटनो ने इसको भी नहीं बक्शा केवल अपनी राजनितिक महत्वकंषा के लिए और मुस्लिम वोट बैंक के निचले स्तर की मानसिकता से ग्रस्त इन लोगो ने इस को झुटा एनकाउंटर साबित करने की कोशिस की यहाँ तक की भारत के सबसे बड़े दल कांग्रेस के एक नेता तो इसको एक झुटा एनकाउंटर करार दिया इस लिंक को देखे  http://ibnlive.in.com/news/batla-encounter-may-be-fake-cong/109638-37.html
यदि में कहूँ की भारत के तथाकतित सेक्युलर नेता अपने देश के दुश्मन आतंकियों को सम्मान देते है तो आप लोगो को आश्चर्य होगा परन्तु ये सच है इस लिंक को देखे  http://www.youtube.com/watch?v=WsM58-tboek. इस कड़ी में जो व्यक्ति इस बयान दे रहा है  यह भारत की बड़ी पार्टी के एक बड़े नेता ने कहा है. यह हमारे लिए बहुत हानिकारक है और यह एक बार नहीं है. हर बार इस प्रकार के राजनीतिज्ञ मुस्लिम मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए और केवल स्वयं लाभ के लिए आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और कमजोर कर रहे है 
हमारे राजनेता एसे बयान एक बार देते है पर इसका असर देश के आतंक के विरुद्ध लड़ाई पर असर करता है जो इस देश के लिए खतरनाक है  यही हमारे राजनेताओ की कमजोरी है और इस कारण ही इस देश के आतंक के विरुद्ध लड़ाई की प्रतिबध्धता पर प्रश्न उठते है इस प्रकार के बयान देश के सुरक्षा एजेंसी और पुलिस का मनोबल कमजोर करते है केवल इस कारण पुलिस अपराधी के खिलाफ कोई कार्यवाही भी नहीं किया करते  
आज हम प्रश्न करते है की पुलिस दिल्ली के बलात्कार के मामलो में क्या कर रही है???  उत्तर यही है कुछ नहीं पर एसा क्यों है क्योकि देश के तथाकतित सेक्युलर नेता और  तथाकतित मानवाधिकार कार्यकर्ता पुलिस के कारवाही में अवरोध उत्पन्न करते है
अगर हमको आतंकवाद और अपराध के खिलाफ जीतना है तो हमको एकजुट होकर इन राजनेताओ और मानवाधिकार संगटन के लोगो को सबक सिखाना चाहिए  जो जिम्मेदार है आतंक और क्राइम को बढावा देने के लिए वो लोग जो उन एनकाउंटर में मारे गए क्या वो सामान्य लोग थे नहीं वो अपराधी थे और उनका अंजाम यही होना चाहिए था ताकि बाकि अपराधियों को सबक मिल सके पर हमारे इन जेसे स्वार्थी नेताओ के कारण पुलिस के बजाय अपराधियों का मनोबल ऊँचा हो गया है तो हमारी नीतिया एसी होनी चाहिए जिससे पुलिस का मनोबल ऊँचा हो तथा अपराधियों को सबक सिखाया जा सके और अपने समाज को सुरक्षित रखा जा सके और इस के लिए हमको उन नेताओ को सबक सिखाना चाहिए जो एक वर्ग विशेष के वोट की राजनीती कर देश के आतंक के विरुद्ध लड़ाई को कमजोर करते है

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