भारत में इस समय कई मुद्दों, और यह एक धर्मनिरपेक्षता और सांप्रदायिकता भी है. कांग्रेस इस मामले में खुद को भारत में गैर सांप्रदायिकता की श्रेणी में रखती है और हमेशा से भाजपा और नरेंद्र मोदी को दोष दिया जाता है संप्रादियक होने का हाँ गुजरात दंगा सच है, लेकिन यह पूरी तरह से प्रशासनिक विफलता और प्रशासनिक विफलता है और ये कई बार हुआ है. यदि यह मामला नहीं है,तो सभी दंगों के लिए सभी सरकार को दोष दिया जाना चाहिए फिर चाहे वो भाजपा या कांग्रेस या किसी और का हो लेकिन भारत ने सांप्रदायिक या गेर सांप्रदायिकता के लिए कई पैरामीटर कर लिए है जिसमे भाजपा के लिए अन्य है और कांग्रेस के लिए अन्य है यह पूरी तरह से गलत है
लेकिन कोई एक मेरी नज़र मे कोई भी धर्मनिरपेक्षता की श्रेणी में नहीं है. धर्मनिरपेक्षता महज एक भ्रम है. आप लोग सोच रहे होंगे की आखिर कांग्रेस ने एसा क्या कर दिया है की मे उनको सेक्युलर नहीं मान रहा . तो मैं कांग्रेस के बारे में कुछ तथ्य है जो धर्मनिरपेक्षता के लिए कांग्रेस प्रकृति के बारे में उनकी पोल खोलते है आप को इस पर आश्चर्य हो सकता है.परन्तु जनता को ये सच्चाई पता होना चाहिए
मेरा पहला उदाहरण जिसके बारे मे बहुत कम लोग जानते है दंगा जो 06 सितम्बर 2012 मे उड़ीसा मे हुआ तथाथाकतित गैर सांप्रदायिक पार्टी कांग्रेस के नेता जगदीश टाईटलर जनता को इस लिंक मे साफ साफ जनता को मारने और दंगा करने के लिए भड़का रहे है. https://www.youtube.com/watch?v=Ldj3RiBW_AQ
इस से पहले भी इस नेता पर सिख दंगो मे जनता को भडकाने का आरोप लगा था पर कांग्रेस की UPA की सरकार ने इसको कोर्ट से बरी करवा दिया पर इस बार ये कांग्रेस की असलियत की पोल खोल देता है जिसके बाद हुई हिंसा मे कांग्रेस के कार्यकता एक महिला सिपाही पर टूट पड़े और उसको बुरी तरह मारा.इस पर दंगा भडकाने के लिए केस दर्ज किया है https://www.youtube.com/watch?v=hMQB7sdDlck परन्तु इन पर कोई एक्शन कांग्रेस ने नहीं लिया क्योकि ये जगदीश टाईटलर सोनिया गाँधी और गाँधी परिवार के करीबी है
मेरा दूसरा उदाहरण है 1984 के सिख दंगे इस समय भी दिल्ली मे और केंद्र मे कांग्रेस का शासन था http://en.wikipedia.org/wiki/1984_anti-Sikh_riots इस समय कांग्रेस के नेताओ ने देश के एक अल्पसंख्यक समुदाय को चुन चुन कर निशाना बनाया इन दंगो मे कांग्रेस के नेता सीधे शामिल थे और इन दंगो मे 3000 से अधिक लोगो की मौत हुई http://www.bbc.co.uk/news/world-asia-india-17811666 / sikh riots truth इस मे जगदीश टाईटलर ने जनता को अल्प संक्यक सिख समुदाय के विरुद्ध लोगो को भडकाया जिसके के बाद 3000 मासूम लोगो की हत्या की गयी ये लिंक देखे https://www.youtube.com/watch?v=0_zu87aKC7U इसके लिए एक चश्मदीद को अपनी जान बचाने के लिए दुसरे देश मे शरण लेनी पड़ी https://www.youtube.com/watch?v=JfLb7P3rtE0
मेरा तीसरा उदाहरण है 1992 का मुंबई का दंगा इस समय और केंद्र मे और राज्य मे कांग्रेस का शासन था सरकार कांग्रेस की थी और मुक्यमंत्री शरद पवार थे http://en.wikipedia.org/wiki/List_of_Chief_Ministers_of_Maharashtra ये दंगे 16 दिसंबर 1992 से शुरू हुए जिसमे 900 लोग मारे गए http://en.wikipedia.org/wiki/Bombay_Riots इस समय कांग्रेस सरकार भी गुजरात के 2002 के दंगो के समान समय पर फसाद को रोक नहीं पाई
मेरा अगला उदाहरण नवी मुंबई मे 2006 मे हुआ होली का दंगा है इस समय भी केंद्र और राज्य मे कांग्रेस की सरकार थी और इस सरकार के मुखिया विलास राव देशमुख थे इन दंगो मे 35 लोग घायल हुए थे इन दंगो का आरम्भ छोटे झगड़े से शुरू हुआ पर कांग्रेस की सरकार ने समय पर कारवाही नहीं करने से ये बड़े पेमाने पर फेल गया http://ibnlive.in.com/news/riots-in-navi-mumbai-after-holi/6853-3.html
मेरा अगला उदाहरण है हाल ही मे हुआ असोम दंगा जिसमे कांग्रेस की विफलता सामने आ गयी सरकार 10 दिनों तक सोती रही और मासूम लोगो का क़त्ल होता रहा इन दंगो मे 77 लोग मारे गए यही यदि यहाँ बीजेपी की सरकार होती तो इसमे भी कांग्रेस और तथाकथित सेक्युलर लोग BJP और RSS को कोसने लगते http://en.wikipedia.org/wiki/2012_Assam_violence
मेरा अगला उदाहरण है रामानंद दंगा तमिलनाडू ये दंगा 1956-57 मे हुआ इस समय भी केंद्र और राज्य मे कांग्रेस की ही सरकार थी और ये दंगा सिख दंगो की भाती राजनीती से प्रेरित था इस मे तमिल समुदाय को निशाना बनाया गया http://en.wikipedia.org/wiki/1957_Ramnad_riots
एसे कई उदाहरण है जेसे 1991 के मुख्यमंत्री एस .बंगारप्पा कर्णाटक और सरकार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के काल मे हुए तमिल विरोधी दंगे http://en.wikipedia.org/wiki/1991_Anti-Tamil_violence_of_Karnataka
मुंबई 2012 महाराष्ट्र के दंगे जो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सरकार के काल मे हुए इस मे दंगइयो ने न केवल सरकारी सम्पति को नुकसान पहुचाया बल्कि देश के वीर शहीदों का भी अपमान किया पर कांग्रेस केवल एक समुदाय को संतुष्ट करने के लिए दंगा देखती रही और कुछ नहीं किया http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2012-08-11/mumbai/33152846_1_muslim-community-muslim-organizations-assam
इन दंगो और 2002 के गुजरात के दंगो मे केवल एक असामनता है की इन सब मे कांग्रेस की सरकार थी और 2002 के दंगो मे भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी जबकि समानता ये है की इसमे सरकार की प्रशासनिक विफलता सिद्ध हो गयी ये कह कर मे इन दंगो को सही नहीं ठहरा रहा बल्कि अपने आप को सेक्युलर कहने वालो के मुह से नकाब हटा रहा हूँ जिससे इस देश की जनता इसके छलावे को समझ सके कांग्रेस ने इस देश की जनता को खास कर अल्पसंक्यक की बात कर के जनता को आज तक केवल मुर्ख बनाया है कांग्रेस का ये नकाब केवल जनता को छलने के लिए बड़ा हथियार है.दुःख के साथ मे ये कह रह हूँ की आज गैर साम्प्रदायिकता एक मजाक बन कर रह गया है
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