Monday, June 11, 2012

चाणक्य और वर्त्तमान राजनीती

                     चाणक्य  के  अनुसार  “ यदि  एक  व्यक्ति  के  कारण  परिवार  को  ,एक  परिवार  के  कारण  समाज  को , एक  समाज  के  कारण  गाव  को  और  यदि  एक  गाव के  कारण  देश  को  खतरा  हो  तो  एसे  व्यक्ति , या  परिवार , या  समाज , या  गाव का  त्याग  कर  देना  चाहिए ”.
                     भारत  मे  दो  राजनितिक  मान्यता  रही है I
1 चाणक्य  की  साम  दाम  दंड  भेद
2 अंग्रेजो  की  फूट  डालो  राज  करो की
                      भारत  की  राजनीती  मे  इनका  प्रयोग  सबसे अधिक होता  है I

                      इन  दोनों  मान्यताओ  मे  बहुत  अंतर  है  और  उसके  प्रयोग   मे  भी  बहुत  अंतर  रहा  है  . जहाँ एक  और  चाणक्य  ने  साम  दाम   दंड  भेद  की  निति  का  प्रयोग  भारत  की  एकता  और  अकंदाता  को  सुनिश्चित  करने  के  लिये  किया I उनका उद्देश्य अच्छा  था  वो  राष्ट्र  को  सत्ता लोलुप   अहंकारी  और  नीजी  सवार्थ   के  लिए  कुछ  भी  करने  वाले  राजाओ   से  देश  की  रक्षा  करना  चाहते  थे . वही दूसरी  और  अंगरेजो  ने  फूट  डालो  राज  करो  की  निति  को   अपना  कर  उन्होंने  भारत  के  ताने  बाने  को  कमजोर  कर  देश  पर  शासन  किया
                      आज  की  परिस्थितियां  भी  चाणक्य  के  समय  के  सामान  ही  है . आज  के   राजनेता  भी  चाणक्य  की  साम  दाम  दंड  भेद  की  निति  का  paryog  सवार्थ   के  लिए  और  अंग्रेजो  की  फूट  डालो  राज  करो  की  निति  केवल  अपनी  सत्ता  बनाये  रखने  के  लिए  कर  रहे है . निज  सवार्थ  मे  डूबा  हुआ  हमारा  राजनितिक  समाज  का  एक  हिस्सा  राष्ट्र  के  नागरिको  के  कल्याण  से  विमुख होने  के  साथ  राष्ट्रीय  सुरक्षा  और  राष्ट्रीय  हितो  को  भी  नुकसान  पंहुचा  रहा  है . वही  ये  लोग  न  केवल  राष्ट्र  के  लिए  काम  करने  वाले  लोगो  को  देशद्रोही और सांप्रदायिक करार दे रहे है . भारत  की  जनता  भी  एसे  लोगो  की  साजिश  को  नहीं  समझ पा  रहे . वो  आज  भी  सत्ता  लोलुप  लोगो  के  बातो  को  मानते  है  और  देश  हित  मे  काम  कर  रहे  लोगो  को  बदनाम  किये  जा  रहे  है
                     उस  समय  तो  चाणक्य  और  उनके शिष्य चन्द्र गुप्त मोर्य  थे  जिन्होंने  राष्ट्र  के  लिए  पूरा  जीवन  लगा  राष्ट्र  की  रक्षा  की . पर  आज  राष्ट्र  के  लिए   चाणक्य  और  उनके शिष्य चन्द्र  गुप्त  नहीं  है  पर  समस्या  तो  है आज देश के सामने UPA के रूप मे और ब्रष्ट नेताओ और ब्रष्ट अधिकारी के रूप मे कई धनानद है. अन्ना जेसे लोग इनसे कुछ लड़ने का प्रयास तो कर रहे है पर उनको भी जनता का साथ पूरा नहीं मिल रहा ये एक कडवी सच्चाई है.
                     आज देश की जनता को ही सही और गलत के बारे मे चुनना होगा. खुद से सवाल करना होगा की ये जो जनता के साथ होने की बात करने वाले और जनता का खून चूसने वाले वाले अच्छे है ये देश को नयी दिशा देने वाले क्योकि  आज चाणक्य  और उनके शिष्य चन्द्र गुप्त का काम देश की जनता को ही करना होगा.


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